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हालाँकि सूर के जीवन के बारे में कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं, पर इन में कितनी सच्चाई है यह कहना कठिन है। कहा जाता है उनका जन्म सन् १४७८ में दिल्ली के पास एक ग़रीब ब्राह्मीण परिवार में हुआ। जनश्रुति के अनुसार सूरदास जन्म से ही अंधे थे। आजकल थी अंधे आदमी अक्सर 'सूरदास' कहलाते हैं। कई लोगों ने उन्हें गुरु के रूप में अपनाया और उनकी पूजा करना शुरु कर दिया ।

हालाँकि सूर के जीवन के बारे में कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं, पर इन में कितनी सच्चाई है यह कहना कठिन है। कहा जाता है उनका जन्म सन् १४७८ में दिल्ली के पास एक ग़रीब ब्राह्मीण परिवार में हुआ। जनश्रुति के अनुसार सूरदास जन्म से ही अंधे थे। आजकल थी अंधे आदमी अक्सर 'सूरदास' कहलाते हैं। कई लोगों ने उन्हें गुरु के रूप में अपनाया और उनकी पूजा करना शुरु कर दिया ।

हालाँकि सूर के जीवन के बारे में कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं, पर इन में कितनी सच्चाई है यह कहना कठिन है। कहा जाता है उनका जन्म सन् १४७८ में दिल्ली के पास एक ग़रीब ब्राह्मीण परिवार में हुआ। जनश्रुति के अनुसार सूरदास जन्म से ही अंधे थे। आजकल थी अंधे आदमी अक्सर 'सूरदास' कहलाते हैं। कई लोगों ने उन्हें गुरु के रूप में अपनाया और उनकी पूजा करना शुरु कर दिया ।

हालाँकि सूर के जीवन के बारे में कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं, पर इन में कितनी सच्चाई है यह कहना कठिन है। कहा जाता है उनका जन्म सन् १४७८ में दिल्ली के पास एक ग़रीब ब्राह्मीण परिवार में हुआ। जनश्रुति के अनुसार सूरदास जन्म से ही अंधे थे। आजकल थी अंधे आदमी अक्सर 'सूरदास' कहलाते हैं। कई लोगों ने उन्हें गुरु के रूप में अपनाया और उनकी पूजा करना शुरु कर दिया ।

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